हेलो दोस्तों इस ब्लॉग पोस्ट के माध्यम से हम लोग जानेंगे कि संक्रमण तत्व की परिभाषा ? या संक्रमण तत्व से क्या समझते हैं? तथा संक्रमण तत्व की श्रेणियां और संक्रमण तत्व की विशेषताएं को भी जानेंगे। इसलिए इस ब्लॉग पोस्ट को पूरा तथा ध्यान से पढ़ें।

संक्रमण तत्व क्या है? ( sankraman tatva kise kahate hain )


संक्रमण तत्व वह होते हैं जिसका d- उपकोश अथवा परमाणु अवस्थाओं में अथवा आयोनिक अवस्था में आंशिक रूप से भरा होता है। वह संक्रमण तत्व कहलाता है।

                                अथवा

संक्रमण तत्व उसे कहते हैं आवर्त सारणी में d एवं I ब्लॉक के तत्व को जोड़ने वाले तत्व को संक्रमण तत्व कहते हैं।

आधुनिक संक्रमण तत्व की परिभाषा ( sankraman tatva ki paribhasha)


वह तत्व जिसमें परमाणुवीय अवस्थाओं में d- अथवा f- उपकोष को आंशिक रूप से भर दिया जाए।

           दूसरे शब्दों में वह तत्व जिसमें तत्वों की किसी सामान्य ऑक्सीकरण अवस्था में d- अथवा f- उपकोष को आंशिक रूप से भर दिया जाए वह संक्रमण तत्व कहलाता है।



संक्रमण तत्व की श्रेणी


आवर्त सारणी में मुख्य तौर पर संक्रमण के चार श्रेणियां होती है -

1. पहली संक्रमण श्रेणी में स्कैंडियम पर प्रारंभ होती है और ताम्र पर समाप्त होती है।



2. जबकि दूसरी तीसरी चौथी श्रेणियां क्रमश:  ईट्रियन , लैथेनम और एक्टिनियम पर प्रारंभ होती है। एवं क्रमश: रजत और स्वर्ण पर समाप्त होती है।

3. इसी श्रेणी को क्रमश: 3d , 4d, 5d एवं 6d श्रेणी भी कहा जाता है।


संक्रमण तत्व की विशेषताएं - ( sankraman tatva ki visheshtaen )


 इलेक्ट्रॉनिक विन्यास – इलेक्ट्रॉनिक विन्यास संक्रमण तत्व की एक मुख्य विशेषता हैं। संक्रमण तत्व का सामान्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास (n-1)d1-10nsl-2 होता है।

• उत्प्रेरक लक्षण - सामान्य तौर पर संक्रमण धातु तथा उसके योगी को में उत्प्रेरकीय गुण पाया जाता है।

• परिवर्ती ऑक्सीकरण अवस्थाएँ - संक्रमण तत्व परिवर्ती ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करता है। इसलिए होता है क्योंकि d-ब्लॉक के संक्रमण तत्वों में ns ऑर्बिटल तथा (n – 1)d ऑर्बिटल दोनों के इलेक्ट्रॉनिक आपस में रासायनिक बंधन बनाने में सहयोग करते हैं।

• आयनन विभव में परिवर्तन – संक्रमण तत्वों में आयरन विभव में परिवर्तन होना संक्रमण तत्व की मुख्य विशेषता है।

• चुंबकीय गुणधर्म - संक्रमण तत्वों में चुंबकीय गुणधर्म पाया जाता है। संक्रमण तत्व चुंबकीय आकर्षक की क्षमता होती है।

• रंगीन यौगिक बनाने की लक्षण - संक्रमण तत्व रंगीन योगिक बनाने की प्रवृत्ति रखते हैं। संक्रमण तत्व s तथा p- ब्लॉक के तत्व प्रयास सफेद रंग की यौगिक बनाते हैं।


निष्कर्ष ( अन्तिम शब्द )

लिखे गए बातों से आप लोग ने जाना कि संक्रमण तत्व किसे कहते हैं? या संक्रमण तत्व क्या है? यह संक्रमण तत्व से क्या तात्पर्य है? और साथ ही साथ संक्रमण तत्व की विशेषताएं क्या है को भी जाना।

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